पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में यातायात दुर्घटनाओं में 1.99 लाख लोगों की मृत्यु हुई, जो 2023 की तुलना में 0.79% अधिक है।
प्रमुख निष्कर्ष
- यातायात दुर्घटनाओं में सड़क दुर्घटनाएँ, रेल दुर्घटनाएँ, रेलवे पटरियों अथवा रेलवे परिसरों में हुई घटनाएँ तथा रेलवे क्रॉसिंग पर हुई दुर्घटनाएँ सम्मिलित हैं।
- सड़क दुर्घटनाएँ: 2024 में दर्ज 1.99 लाख यातायात-संबंधी मौतों में से 1.75 लाख (88%) सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुईं।
- केवल सड़क दुर्घटनाओं की सामाजिक-आर्थिक लागत भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 3.14% है।
- दोपहिया वाहन अधिकांश घातक सड़क दुर्घटनाओं के लिए उत्तरदायी हैं, इसके बाद पैदल यात्री और कारें आती हैं।
- तीव्र गति सबसे बड़ा कारक है, जो कुल सड़क मृत्यु का 58% है।
- मृत्यु दर के मामले में शीर्ष तीन राज्य उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र हैं।
भारत में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के कारण
- अत्यधिक गति और लापरवाह ड्राइविंग: तीव्र गति, खतरनाक ओवरटेकिंग, शराब पीकर वाहन चलाना और मोबाइल फोन का उपयोग प्रमुख कारण हैं।
- खराब सड़क अवसंरचना: गड्ढेदार सड़कें, अपर्याप्त संकेतक, खराब रोशनी और असुरक्षित सड़क डिज़ाइन दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ाते हैं।
- यातायात नियमों का कमजोर प्रवर्तन: अपर्याप्त निगरानी और असंगत प्रवर्तन के कारण सुरक्षा नियमों का पालन कम होता है।
- उचित चालक प्रशिक्षण का अभाव: कमजोर लाइसेंसिंग प्रणाली और अपर्याप्त शिक्षा के कारण अनुभवहीन और गैर-जिम्मेदाराना ड्राइविंग होती है।
- वाहनों की तीव्र वृद्धि और यातायात जाम: वाहन स्वामित्व में वृद्धि बिना सड़क अवसंरचना के विस्तार के, अव्यवस्थित और असुरक्षित यातायात स्थितियाँ उत्पन्न करती है।
- आपातकालीन और ट्रॉमा देखभाल की कमजोरी: चिकित्सा सहायता में देरी और अपर्याप्त ट्रॉमा देखभाल सुविधाएँ, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, दुर्घटनाओं के बाद मृत्यु दर बढ़ाती हैं।
सरकारी पहल
- राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति, 2010: बेहतर सड़क अवसंरचना, यातायात नियमों का सख्त प्रवर्तन, उन्नत आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ, जन-जागरूकता अभियान और दुर्घटना के बाद देखभाल पर बल दिया गया।
- ई-डीएआर/आई-आरएडी: सड़क दुर्घटना डेटा की रिपोर्टिंग, प्रबंधन और विश्लेषण हेतु केंद्रीकृत प्रणाली।
- दुर्घटना पीड़ितों को शीघ्र सहायता:
- दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने वाले “गुड समैरिटन” को ₹25,000 का पुरस्कार।
- शीघ्र मुआवज़ा: गंभीर चोट के लिए ₹2.5 लाख, मृत्यु के लिए ₹5 लाख।
- हिट-एंड-रन पीड़ितों के लिए उन्नत मुआवज़ा: मृत्यु पर ₹2 लाख, गंभीर चोट पर ₹50,000।
- तृतीय-पक्ष बीमा की सरल प्रक्रिया, जिसमें किराए के चालक भी शामिल।
- वाहन फिटनेस: पुराने और अनुपयुक्त वाहन दुर्घटनाओं में योगदान करते हैं। मंत्रालय ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में मॉडल निरीक्षण और प्रमाणन केंद्र स्थापित किए हैं (2024 तक 28 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश शामिल)।
- आईआईटी मद्रास सहयोग: सड़क सुरक्षा हेतु उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना, नए उत्पादों का विकास, अनुसंधान और सुरक्षा पहलों को बढ़ावा।
- दुर्घटना ब्लैकस्पॉट सुधार: राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना-प्रवण स्थलों की पहचान और इंजीनियरिंग उपायों द्वारा सुधार।
- सड़क सुरक्षा ऑडिट: सभी राजमार्ग परियोजनाओं में डिज़ाइन, निर्माण और संचालन चरणों पर अनिवार्य ऑडिट।
- ब्रासीलिया घोषणा (2015): भारत उन प्रारंभिक 100+ देशों में शामिल था जिन्होंने सतत विकास लक्ष्य 3.6 को प्राप्त करने हेतु 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली वैश्विक मृत्यु और चोटों को आधा करने का संकल्प लिया।
- मोटर वाहन संशोधन अधिनियम, 2019: इस अधिनियम ने यातायात उल्लंघनों के लिए अधिक दंड निर्धारित किए, जिनमें तीव्र गति, शराब पीकर वाहन चलाना, हेलमेट या सीट बेल्ट न पहनना शामिल है।
आगे की राह
- भारत ने सड़क सुरक्षा पर आईआईटी और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) जैसे प्रमुख संस्थानों के माध्यम से व्यापक शोध किया है।
- सरकार इन संस्थानों के साथ सहयोग कर नीतियों और कार्य योजनाओं में सुधार कर सकती है।
- कॉर्पोरेट क्षेत्र अनुसंधान को वित्तपोषित कर और जागरूकता फैलाकर सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने में योगदान दे सकता है।
Source: IE
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